Kritesh: I can see for miles and miles and miles…

Sochna To Chhodo

कोई नयी उमंग पनपी है कल,
कुछ नयी तरकीब और एक हलचल,
पर तू उन्हें लेकर बैठ गया है परेशान,
सोच रहा है कैसे करूँगा, आखिर हूँ एक इंसान,
हर बार यह डर की, अकर्म की, रस्म तो तोड़ो
करने की अब बारी है, तुम सोचना तो छोड़ो.
करने की अब बारी है, तुम सोचना तो छोड़ो.

उमंग के पंछी के पर तो निकलने दे,
तरकीब के लोहे को सांचे में तो ढलने दे,
अभी से क्यूँ पंछी को तू उड़ा रहा है,
सांचे की ताकत को अभी से क्यूँ आज़मा रहा है,
उसमें अभी कर्म का लोहा तो जोड़ो,
और उस बेचारे पंछी को दबोचना तो छोड़ो
करने की अब बारी है, तुम सोचना तो छोड़ो.

कब तक तू पुराने दर्द को दोबारा जीता रहेगा,
कब तक पुराने ज़ख्मों को आंसू से सीता रहेगा,
तू यह क्यूँ नहीं समझ रहा की वो दर्द अब बीत गया,
वह काल गया, वह सोच गयी, वो हार गयी और वो तेरा मीत गया,
वो साहिल तेरी गलती थी, पर दोबारा अपनी नाव तो मोड़ो,
ज़ख्म तेरे भर जायेंगे, बस उन्हें खरोचना तो छोड़ो.
करने की अब बारी है, तुम सोचना तो छोड़ो.

लोगों के शब्दों की तलवार से क्यूँ डरता है,
अनजानों के इस तुच्छ वार से क्यूँ मरता है,
वो आज ऊपर है, इसीलिए तुझे टोकता है,
पर तू अपने कोप में जा, खुदको ही रोकता है,
परेशां हो दुनिया से, तकदीर के पन्नों को नोचना तो छोड़ो,
तकदीर तेरी तेरे हाथ में है, बस उसे कोसना तो छोड़ो.
करने की अब बारी है, तुम सोचना तो छोड़ो.
करने की अब बारी है, तुम सोचना तो छोड़ो.

  • करने की अब बारी है, तुम सोचना तो छोड़ो.
    करने की अब बारी है, तुम सोचना तो छोड़ो.

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  • nice one! :)

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  • nice and inspirational liked it :)

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